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बुधवार, 30 मार्च 2016

इमानदारी

205.
इमानदारी

नोकरी ज्वाइन करबाक लेल मेडिकल सर्टिफिकेट बनबेनाइ परम् आवश्यक छल ।दू दिन हॉस्पिटल सँ घुरि गेल रही ।डॉक्टर साहेब कतौ गेल छलथि ।काल्हि अंतिम दिन छल तेँ आइ भोरे पहुँचि गेलौं ।डॉक्टर साहेबक तीन-चारि टा कम्पाउण्डरमे सँ एकटाकेँ अपन बात कहलौं ।ओ फॉर्म सब भरबा क' हर्ट,बीपी, सब चेक क' लेलक आ फेर हमरा कहलक जे पेपर वेट अछि ने ?हम ओकर बात नै बुझलौं तेँ हाँ मे हाँ मिला देलौं ।तखने घंटी बजल । ओ हमरा आ फाइल ल' क' डॉक्टर लग पहुँचि गेल ।फॉर्मकेँ देख क' डाक्टर साहेब पुछलखिन " वेट कितना है ?"
कम्पाउण्डर हड़बड़ाबैत कहलक "अभी नहीं लिये हैं सर ।" बस डॉक्टर साहेब फॉर्मके साइड क' वेट लेबाक लेल कहि गेम खेलैमे व्यस्त भ' गेलाह ।कम्पाउण्डर हमरा बाहर आनलक आ पाँच सह रूपैया माँगलक ।हमरा बड आश्चर्य भेल जे सरकारीमे ई कोन फीस छै ।हम पुछलियै- कोन चीजके हौ ?
-अरे एत' फाइल तखने घुसकै छै जखन ओइपर पेपरवेट रहै छै ।केहन भूच्चर छी जे इहो नै जानै छी !
-एँ हो ई पाँच सौ त बड बेसी भेलै ?
- यौ सरकार दोसरसँ कहि क' देखियौ, ओ आठसँ लेल ।हम सब अपन धन्धामे इमानदारी रखै छी तेँ एतबे माँगलौं ।
ई सुनिते निर्णय नै क' पाबि सकल छलौं जे एकरा इमानदारी कही वा ....!

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31 - 03 - 2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2298 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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