प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।

रविवार, 8 जनवरी 2017

लप्रेक- अगत्ती

#लप्रेक- अगत्ती
- रौ बजरखसुआ, एना घंटी किए टुनटुनाबै छें रौ ?
-गै मुहफट्टी, एना ठिठियाइ किए छहीं गै ?
- हमर मुँह, हम कुच्छो करब तोहर बापकेँ कथी जाइ छौ रौ ?
- हमरो घंटी, हमर मर्जी, तोहर बपहियाकेँ कथी जाइ छौ ?
- हे बेसी मुँह नै लगा, नै त' मुँह नछोरि लेबौ ।तोरा बुझल नै छौ जे घंटी सुनि हमर मोन कोनादन कर' लागै छै ।
- तोरा बुझल नै छौ जे तोरा मुस्कैत देख हमर करेजा धकधकाए लागै छै ।
- रे जोनपिट्टा सरधुआ, तोहर कहैक कथी मतलब छौ ?
- गै हुरहुट्टी, हमर वैह मतलब छै जे तोहर मतलब छौ ।
- त' बकौर लागल छौ की ? साफ साफ नै बोलि होइ छौ ?
- तूँ किए नै बाजै छहीं ? तूँ की भगवत्ती बनबहीं ?
- तूँ कहबहीं त' अगत्ती बनि जेबौ ।
- बनि जो ।
- भक् ।

लप्रेक-बन्धन

#लप्रेक- बन्धन
-एकटा बात पुछौं अहाँसँ ?
- हँ यै सजनी, एकटा किए, दस टा पुछू ।
- ओना त' हमर-अहाँक बन्धन जनम-जनम धरि जुड़ल रहत मुदा जँ अगिला जनममे हम मनुख बनि गेलियै आ अहाँकेँ मनुखक योनि नै भेटय तखन की करबै ?
- तखन...तखन किछु और बनबै ।
- तखन की बनबै ?
- तखन हम कपासक गाछ बनबै ।
- से किए ।
- ऐ लेल जे तखन हम धागा बनि अहाँक कपड़ामे सजि क' सदिखन अहाँ संग आलिंगनवद्ध रहब ।
- भक् !

लप्रेक- नया साल

#लप्रेक - नया साल
- ओह, कने काल और सुतू ने ।एखन अन्हारे छै ।एतेक भोरे ऊठि क' कोन पहाड़ तोड़बै !
- दुर जाउ, सदिखन अहाँ मजाखे करै छी ।सुतबै त' चुल्हा के फुकतै ?
- एँ ! चुल्हा...आइ की छै जे चुल्हाक चक्करमे जाइ छी ?
- जाउ, अहाँ सब दिन बुड़बके रहि गेलौं ।यौ आइ नया साल छै, नया साल ।
- गोली मारू एहन नया सालकेँ ।अहाँ संग कोनो दिन पुरान थोड़बे बुझाइ छै ।नीन खुलै आ अहाँक सुन्दर मुँह आँखिक आगू आबि जाइ आ अहाँ नन्हकी मुस्की द' करेजासँ साटि लेब।बस ओ दिन हमरा लेल नये साल जकाँ बिततै ।
- भक्, अहूँ ने भोरे-भोरे बौरा जाइ छी ।

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

बाल कविता

काज करब नै हम अधलाह
नै करब दुखमे हम आह
नै लागय घृणा केर धाह
तखने जग करतै वाहवाह
प्रेम मनुखक पहिल निशानी
नै बनब कहियो अभिमानी
मनुखता केर बनब अभियानी
जग पढ़तै त हमर कहानी

चन्ना रौ

चन्ना रौ चन्ना रौ
खा ले ओलक सन्ना रौ
कने जमीरी नेबो फेटल
तैपर गोट दुगुन्ना रौ

नोटबंदी

-रौ बहिं, मलिकबा अन्हराकेँ हाइकोट देखबै छलै ।
- की भेलौ से ?
- की कहियौ, आइ गजब भ' गेलै ।पिछला सब वकाया द' बोनस सेहो देलकै...मुदा...
-मुदा की ?
-बदलामे अपन दू किओ सोना गाम ल' जा क' नुकाबै लेल कहलकै ।ओ त' बुझलकै जे हम किछु जानिते नै छीयै ।हम मना क देलियै ।
- नीक केलें ।तें ने एकरा सबपर नोटबंदीक असर नै पड़लै ।गरीब-गुरबाकें बहला-फुसला क' ई चोर सब बचि जाइ छै आ हम सब पकड़ा जाइ छी ।
- जे ने कराबय नोटबंदी ।