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मंगलवार, 23 मई 2017

बाल कविता- जंगलमे फैशन

बाल कविता-264
जंगलमे फैशन
लाल टॉपमे ललिया लुक्खी
लागि रहल छै सुन्नर
जिंस चढ़ा क' दड़बड़  मारै
मुसरी और छुछुन्नर

लंहगा-चुनरी पहिर क' नाचै
खूब डीजेपर  मोरनी
बकरी  सेहो  कीन  लेने  छै
नवका नवका ओढ़नी

कोट पहिर क' शेरू राजा
चला रहल स्कूटी
हॉट  सूटपर  मेकप   केने
बनरी देखबै ब्यूटी

बानर मामा पहिर क' कुर्ता
संग उज्जर पैजामा
मोछ छिला क' भालू भैया
गाबय फिल्मी गाना

सजै-धजैमे व्यस्त भेल सब
काजक बेर बहाना
आबि  गेल  जंगलमे  सेहो
फैसन केर जमाना

पप्पा जी यौ पप्पा जी

बाल कविता-263

पप्पा जी यौ पप्पा जी
कीन दिअ गोलगप्पा जी

देखिते मुँहमे आबय पानि
एकरा खाइमे नहियें हानि
खटगर नुनगर पप्पा जी
पप्पा जी यौ पप्पा जी

चोखा संगे तिखगर पानि
नोर खसय नै तकर मानि
बेसी खाइ के पप्पा जी ?
पप्पा जी यौ पप्पा जी

रूबाइ

हमर आँखिमे सपना अहाँ केर छै
हमर दिलपर गोदना अहाँ केर छै
हम अहींक पूरक जकाँ छी प्रिय
हमर भागमे विधना अहाँ केर छै

बुधवार, 3 मई 2017

बच्चा सपना देखै छै

बाल कविता-262
बच्चा सपना देखै छै

छोट   घरमे    संग चच्चा छै
माए   एकटा   एक बच्चा छै

चच्चा भरि दिन खेत जोतै छै
बच्चा  खाली  माटि   खोदै छै

माए    सिबै  छै  कपड़ा-लत्ता
बाच्चा    बिछै   आमक  पत्ता

बच्चा  सपना  खूब    देखै  छै
टाकाक  ओत'  गाछ  रोपै  छै

चारितल्ला   नव   घर बनै छै
कपड़ा- गहनासँ माए सजै छै

साँझे खा क'    खूब    सुतै छै
असली जिनगी ओतै जिबै छै

रविवार, 30 अप्रैल 2017

बाल कविता- हमर मम्मी

बाल कविता-261
हमर मम्मी

भोरे उठै देरसँ सूतै कनिको नै अलसाबै छै
हमर मम्मी हमरा खातिर बहुते कष्ट उठाबै छै

बर्तन-बासन चौका-पीढ़ी भोजन-साजन बनबै छै
कतबो थाकल होइ मुदा कहियो किछु नै सुनबै छै
हमरा हँसेत देख क' उहो हॉलेसँ मुस्काबै छै

अपने अक्षर जानै नै छै हमरा स्कूल पठबै छै
छै निरक्षर बुझह' नै दै जखन हमरा पढ़बै छै
अपने हाथे बस्ता आरो लंच हमर सरियाबै छै

जे किछ माँगी पूरा क' दै, कहियो नै ओ टारै छै
केहनो खौंझल मोन ओकर,   हमरा नै दबारै छै
कनिको माँथ गरम होइ हमर ठंढा तेल लगाबै छै

जखन हेबै नम्हर आरो बनबै बड़का अफसर हम
नै देबै तखन त' कहियो दुख उठबैक अवसर हम
बना क' रानी हम खुएबै हमरा जेना खुआबै छै

अमित मिश्र

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

बाल कविता- रेलगाड़ी

बाल कविता-260
रेलगाड़ी

पाछू डिब्बा आगू इंजन
चढ़िते होइ छै मनोरंजन
छौड़ै  धुआँ  मारै  सीटी
टिकट देखै करिया टीटी
चाना-भाजा खोबिया लाइ
और  बदाम  खूब  बिकाइ
दरभंगासँ   दिल्ली     धरि
सबकेँ घुमबै  दुनियाँ  भरि
छुक छुक  चलै   रेलगाड़ी
आगू चालक पाछू सबार