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बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

गजल- एहन सन अपन वेलेंटाइन हेतै

गजल

किछु एहन सन अपन वेलेंटाइन हेतै
प्रेमक अनुबन्धपर दू टा साइन हेतै

किछु माँगब नै अहाँँ, किछु देबो नै करबै
बिनु कहने सब लुटाबै केँ माइन हेतै

हम राखब छोड़ि देने छी काजर सुइया
प्रियतम छै संग, नै कोनो डाइन हेतै

ई दुनियाँ नै हमर छै नै तोहर मीता
हम तोहर छी हमर तूँ, ई माइन हेतै

चल सजतै अपन नेहक आँगन फेरो
जत' जीवनक स्वादो नै अकथाइन हेतै

2222-1222-2222
अमित मिश्र

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

बौआ बुधियार

बाल कविता-252
बौआ बुधियार

बौआ हमर बड़ बुधियार
नीक हुनक सबटा वेवहार
भोरे होइ बबुरक दतमनि
तखने मम्मी तरथि सजमनि
नहा- धोइ क" रहथि तैयार
राति क' दूध भोर क' सेव
नै बेसी नून वा चिन्नी लेब
दालि भात हुनकर आहार
मम्मी पप्पा बाबा बाबी
चुनि चुनि क' गोरो लागी
तखन इस्कूल जाइथ सरकार

गुरुवार, 26 जनवरी 2017

सिरमामे

बाल कविता- 251
सिरमामे
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बौआ बौआ कौआ बाजल, भोरे भोरे सिरमामे
गाबि पराती खूब सुनेलक, उड़ि उड़ि क' सिरमामे
फूल फुलेलै सुन्दर सुन्दर, उगलै सूरज सिरमामे
चान-तरेगण टाटा केलकै, आबि आबि क' सिरमामे
काँच बबूरक दतमनि राखल, बौआ लेल सिरमामे
सेव बेदाना अंगूर सेहो, राखल देखू सिरमामे
राम राम क' सुग्गा एलै, फेर जगाब' सिरमामे
मामता भरल बोल सुनाबै, माइयो एखन सिरमामे
मुदा घुमै छै सपन लोकमे, बौआ एखन सिरमामे
दुनिया भरिक चिन्ता नै छै, तें छै सुतल सिरमामे

ज्ञाने टा के भीख लेबै

बाल कविता-250
ज्ञाने टा के भीख लेबै

अ आ इ ई क का कि की लिख लेबै
यौ बाबू आब सब किछु पढ़ब सिख लेबै
चोरि-डकैती झूठ-फसक्कर, नै लेबै
जँ लेबै त' ज्ञाने टा के भीख लेबै

कतबो कहतै कियो हमरा छुट्टी ल' ले
उटका-गुटका पान-सुपारी मुट्ठी ध' ले
ओहन दोस्तसँ दोस्ती झट द' झीक लेबै
जँ लेबै त' ज्ञाने टा के भीख लेबै

कतबो कहतै मोनमे अपन धुर्तै ध' ले
ठक-ठकैती क' क' सब किछु अपन क' ले
देतै कतबो लोभ, नै लाख-लिख लेबै
जँ लेबै त' ज्ञाने टा के भीख लेबै

बुझि गेलौं आब ज्ञानेसँ बुधियार बनै
नीक कर्मकेँ केनहिं सब चिन्हार बनै
आलसक अमृत नै, मेहनतिक बिख लेबै
जँ लेबै त' ज्ञाने टा के भीख लेबै

चुनमुन्नीक खेल

बाल कविता- 249
चुनमुन्नीक खेल

चल चुनमुन्नी खेल करै लेल
सुग्गा संगे मेल करै लेल
हम खेबै गहुँमक दाना
तखन गेबै नवका गाना
सुग्गाकेँ देबै लाल मिरचाइ
लागतै क'रू जेतै चिचियाइ
हम जेबै अकाक पार
सुग्गा लेल बन्द केबार
खैबै पाकल लताम तोड़ि
सुग्गा खेतै मैदा घोरि
उड़ि उड़ि क' खूब सिहेबै
मुँह दुसि क' बड खिसियेबै
गोस्सासँ जखने चिचियेतै
पिंजरासँ त' ठोकर खेतै
हँसबै हम त' हा हा हा
कहबै सुग्गा बाहर आ
मोनक गप बताबै छीयौ
कनिको नै नुकाबै छीयौ
ओकर मालिक जखन भेटतै
हमर लोलसँ घायल हेतै
कैद करैक भेटतै सीख
माँगतै अपन प्राणक भीख

रविवार, 8 जनवरी 2017

लप्रेक- अगत्ती

#लप्रेक- अगत्ती
- रौ बजरखसुआ, एना घंटी किए टुनटुनाबै छें रौ ?
-गै मुहफट्टी, एना ठिठियाइ किए छहीं गै ?
- हमर मुँह, हम कुच्छो करब तोहर बापकेँ कथी जाइ छौ रौ ?
- हमरो घंटी, हमर मर्जी, तोहर बपहियाकेँ कथी जाइ छौ ?
- हे बेसी मुँह नै लगा, नै त' मुँह नछोरि लेबौ ।तोरा बुझल नै छौ जे घंटी सुनि हमर मोन कोनादन कर' लागै छै ।
- तोरा बुझल नै छौ जे तोरा मुस्कैत देख हमर करेजा धकधकाए लागै छै ।
- रे जोनपिट्टा सरधुआ, तोहर कहैक कथी मतलब छौ ?
- गै हुरहुट्टी, हमर वैह मतलब छै जे तोहर मतलब छौ ।
- त' बकौर लागल छौ की ? साफ साफ नै बोलि होइ छौ ?
- तूँ किए नै बाजै छहीं ? तूँ की भगवत्ती बनबहीं ?
- तूँ कहबहीं त' अगत्ती बनि जेबौ ।
- बनि जो ।
- भक् ।