प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।

शनिवार, 12 नवंबर 2016

एक कटोरी दूध

बाल कविता-248
एक कटोरी दूध

एक कटोरी दूधमे चिन्नी छै दू मुट्ठी
चारि दाना भात द' बनल जनमघुट्टी

गुरू शुक्र शानि वा रवि सोम  बुध छै
घुट घुट पीब रहल देखू बौआ दूध छै

भोर छै साँझ छै चाहे दिन राति छै
दूधक कटोरी ल' आएल चान शाइत छै

चाह नै पान नै मुदा टॉफी भरपूर छै
बौआ लए गुड़क त' पुआ जरूर छै

मम्मी जैसी दोस्त न कोई

*मम्मी जैसी दोस्त न कोई*

मेरी मम्मी प्यारी मम्मी
मुझको करती प्यार बहुत
लोरी-वोरी खूब सुनाती
करती मुझे दुलार बहुत

देती दूध मिला के केसर
पिस्ता बदाम और काजू भी
देख के नास्ता सब ललचाते
चुन्नी मुन्नी और राजू भी
कपड़े नये दिलाती मुझको
आते जब त्योहार बहुत
अपने पैरों पर बैठा कर
झूला मुझे झुलाती है

सुवह-शाम टीचर बन कर
सबकुछ मुझे पढ़ाती है
गलती होने पर भी मुझको
देती नहीं फटकार बहुत
कार्टुन-तार्टुन मुझे दिखाती
लॉलीपॉप दिलाती है
सुवह को जॉगिंग शाम वॉकिंग
अपने साथ कराती है
माँ के जैसी दोस्त न कोई
देखे हैं मैने यार बहुत

रविवार, 24 जुलाई 2016

यदि पेड़ के चक्के होते

बाल कविता-7
यदि पेड़ के चक्के होते

यदि पेड़ के चक्के होते
मैं भी शहर से हो आता
चाट समौसा इडली डोसा
किसी होटल से खा आता

सुबह सुबह डाली पर चढ़
स्कुल तक मैं पहुँच जाता
छुट्टी होती शाम को तो
घर को वापस आ जाता

दादा जी को पेंशन लेने
जब भी बैंक जाना होता
दादी डॉक्टर के पास जाती
सब को घुमा के ले आता

सचमुच कितना अच्छा होता
यदि पेड़ मे चक्का होता
इंजन के धुआँ से तब तो
जग को राहत मिल जाता

रविवार, 26 जून 2016

धरती मैया

धरती मैया धरती मैया
करती हर पल ता ता थैया
तनिक नहीं तुम थकती हो
दिन भर चलती रहती हो

जैसे चलते चंदा मामा
जैसे चलती घड़ी हमारी
जैसे चलते लट्टू भैया
वैसी हीं है चाल तुम्हारी
तुम्ही रात-दिन करती हो
तनिक नहीं तुम थकती हो

जब भी जाता मेला ठेला
सच में होता बड़ा झमेला
मम्मी धुनती अपना माथा
कहती अब तो चला न जाता
पर तुम तो उफ न करती हो
तनिक नहीं तुम थकती हो

इच्छा है कि

बाल कविता-5
इच्छा है कि
इच्छा है कि चाँद पर जा कर
छोटा सा एक घर बना कर
रहूँ वहाँ मैं शान से
बातें करू आसमान से

तारे संग मैं लूडो खेलूँ
ग्रहों के संग लगाऊँ रेस
पिकनिक मैं मनाऊँ जाकर
रोज रात परियों के देश

बादल पर मैं स्नान करूँ
उल्का संग करूँ अटखेल
दुसरी दुनियाँ खोजूँ जाकर
एलियन संग करूँ मैं मेल

धरती पर मैं जब भी आऊँ
लाऊँ वहाँ से कुछ संदेश
सौरमंडल के किस्से कह कर
मिटाऊँ जग से कलह क्लेश

मेरे डैडी जी

4. मेरे डैडी जी

सबसे प्यारे सबसे सच्चे मेरे डैडी जी
लगते मुझको सबसे अच्छे मेरे डैडी जी

चॉकलेट टॉफी लाते हैं
पिकनिक पर ले जाते हैं
सन्डे को शॉपिंग करबा कर
फिल्म भी वो दिखाते हैं
मेरे संग बनते हैं बच्चे मेरे डैडी जी

कभी नहीं गुस्साते हैं
हरपल वो मुस्काते हैं
शाम को ऑफिस से आ कर
हमको मैथ पढ़ाते हैं
सचमुच में है टीचर अच्छे मेरे डैडी जी

अपने संग सुलाते हैं
लोरी खूब सुनाते हैं
सुबह को मुझको नहला कर
स्कूल भी पहुँचाते हैं
लगते मुझको ईश्वर पक्के मेरे डैडी जी