प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।

रविवार, 24 जुलाई 2016

यदि पेड़ के चक्के होते

बाल कविता-7
यदि पेड़ के चक्के होते

यदि पेड़ के चक्के होते
मैं भी शहर से हो आता
चाट समौसा इडली डोसा
किसी होटल से खा आता

सुबह सुबह डाली पर चढ़
स्कुल तक मैं पहुँच जाता
छुट्टी होती शाम को तो
घर को वापस आ जाता

दादा जी को पेंशन लेने
जब भी बैंक जाना होता
दादी डॉक्टर के पास जाती
सब को घुमा के ले आता

सचमुच कितना अच्छा होता
यदि पेड़ मे चक्का होता
इंजन के धुआँ से तब तो
जग को राहत मिल जाता

रविवार, 26 जून 2016

धरती मैया

धरती मैया धरती मैया
करती हर पल ता ता थैया
तनिक नहीं तुम थकती हो
दिन भर चलती रहती हो

जैसे चलते चंदा मामा
जैसे चलती घड़ी हमारी
जैसे चलते लट्टू भैया
वैसी हीं है चाल तुम्हारी
तुम्ही रात-दिन करती हो
तनिक नहीं तुम थकती हो

जब भी जाता मेला ठेला
सच में होता बड़ा झमेला
मम्मी धुनती अपना माथा
कहती अब तो चला न जाता
पर तुम तो उफ न करती हो
तनिक नहीं तुम थकती हो

इच्छा है कि

बाल कविता-5
इच्छा है कि
इच्छा है कि चाँद पर जा कर
छोटा सा एक घर बना कर
रहूँ वहाँ मैं शान से
बातें करू आसमान से

तारे संग मैं लूडो खेलूँ
ग्रहों के संग लगाऊँ रेस
पिकनिक मैं मनाऊँ जाकर
रोज रात परियों के देश

बादल पर मैं स्नान करूँ
उल्का संग करूँ अटखेल
दुसरी दुनियाँ खोजूँ जाकर
एलियन संग करूँ मैं मेल

धरती पर मैं जब भी आऊँ
लाऊँ वहाँ से कुछ संदेश
सौरमंडल के किस्से कह कर
मिटाऊँ जग से कलह क्लेश

मेरे डैडी जी

4. मेरे डैडी जी

सबसे प्यारे सबसे सच्चे मेरे डैडी जी
लगते मुझको सबसे अच्छे मेरे डैडी जी

चॉकलेट टॉफी लाते हैं
पिकनिक पर ले जाते हैं
सन्डे को शॉपिंग करबा कर
फिल्म भी वो दिखाते हैं
मेरे संग बनते हैं बच्चे मेरे डैडी जी

कभी नहीं गुस्साते हैं
हरपल वो मुस्काते हैं
शाम को ऑफिस से आ कर
हमको मैथ पढ़ाते हैं
सचमुच में है टीचर अच्छे मेरे डैडी जी

अपने संग सुलाते हैं
लोरी खूब सुनाते हैं
सुबह को मुझको नहला कर
स्कूल भी पहुँचाते हैं
लगते मुझको ईश्वर पक्के मेरे डैडी जी

हिन्दी बाल कविता- शेर जंगल का राजा है

1. शेर जंगल का राजा है

शेर जंगल का राजा है
कितना मोटा ताजा है

सुबह को करता एक्सरसाइज
देखो तो सीने का साइज
ऊँची लम्बी दौड़ लगाता
फिटनेस उसकी खूब लुभाता
फुर्ती खूब दिखाता है
शेर जंगल का राजा है

गुस्से में वो खूब गुर्राता
अपनी पैनी दाँत दिखाता
नाखून भी हैं उसके तेज
फिर भी वन में उसका क्रेज
एकलौता हीं रह पाता है
शेर जंगल का राजा है

जूठा खाना कभी न खाता
भले वो भूखे हीं रह जाता
अपने से हीं करता शिकार
अच्छी आदत सीखो यार
पीता कभी न माजा है
शेर जंगल का राजा है

मच्छर रानी

बाल कविता-247
🌷मच्छर रानी🌷

मच्छर मच्छर मच्छर रानी
तोरे लेल छै मच्छरदानी

साँझे पहरसँ तूँ आबै छें
भिनभिन क' गीत गाबै छें
होइए सबकेँ बड परेशानी

लोल तोहर छौ बड धरगर
पीबै छेँ तूँ शोणित हड़बड़
मोन पड़ैए दर्दसँ नानी

बाँटै छें तूँ बिमारी नम्हर
डेंगू मलेरिया दै छें घर घर
सोचि सोचि टिभकैए चानी

मैक्सो-तेक्सो फेल भ' जाइए
तोहर अबैया नहिये रूकैए
दया कर बालकपर रानी

अमित मिश्र